चहरों के जंगल में कितने क़ाबिल, कितने अलीम
कौन है! जो इस नाफ़हम का पता पूछता है।
आसमां में इक चाँद रोशन, कई सितारों की शम्मे हंसी
गुम्गास्ता एक टूटा तारा अपनी मंज़िल ढूंढता है।
तूफां उड़ा ले आई कहाँ, किस शाख से झरा था मै
तड़प रहा इक सिजदा, मुक़द्दस रौशनी चाहता है।
# अलीम= विद्वान
# नाफ़हम= मुर्ख
# गुम्गास्ता= भटका हुआ
#सिजदा= प्रार्थना
#मुक़द्दस= पवित्र
कौन है! जो इस नाफ़हम का पता पूछता है।
आसमां में इक चाँद रोशन, कई सितारों की शम्मे हंसी
गुम्गास्ता एक टूटा तारा अपनी मंज़िल ढूंढता है।
तूफां उड़ा ले आई कहाँ, किस शाख से झरा था मै
तड़प रहा इक सिजदा, मुक़द्दस रौशनी चाहता है।
# अलीम= विद्वान
# नाफ़हम= मुर्ख
# गुम्गास्ता= भटका हुआ
#सिजदा= प्रार्थना
#मुक़द्दस= पवित्र