यादों के धुंध के पार
कोई तो अपना सा है।
ऐ दिल पास तो जा ज़रा
फिर वो कशिश रहे न रहे।।
दूर कौन सा राग घुल रहा
विरह है या कोई ग़ज़ल।
ऐ दिल सुन तो ज़रा
फिर वो धुन रहे न रहे।।
ये कैसी बयार है बह रही
नशा सा है घुल रहा।
ऐ दिल झूम ले ज़रा
ख़ुमार वो फिर रहे न रहे।।
वो अफ़ताब है या चेहरे का नूर
ख़्वाब होंगे रोशन या जायेंगे जल।
ऐ दिल फ़ासला बना ज़रा
ख़ुद पे इख्तियार रहे न रहे।।
नोट: दूर को कृप्या door पढ़े। सॉफ्टवेयर में प्रोब्लेम के कारण 'द ' पर 'ऊ 'की मात्रा दीखाई नहीं दे रही।
कोई तो अपना सा है।
ऐ दिल पास तो जा ज़रा
फिर वो कशिश रहे न रहे।।
दूर कौन सा राग घुल रहा
विरह है या कोई ग़ज़ल।
ऐ दिल सुन तो ज़रा
फिर वो धुन रहे न रहे।।
ये कैसी बयार है बह रही
नशा सा है घुल रहा।
ऐ दिल झूम ले ज़रा
ख़ुमार वो फिर रहे न रहे।।
वो अफ़ताब है या चेहरे का नूर
ख़्वाब होंगे रोशन या जायेंगे जल।
ऐ दिल फ़ासला बना ज़रा
ख़ुद पे इख्तियार रहे न रहे।।
नोट: दूर को कृप्या door पढ़े। सॉफ्टवेयर में प्रोब्लेम के कारण 'द ' पर 'ऊ 'की मात्रा दीखाई नहीं दे रही।
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