ये मै हूँ

ये मै हूँ
ये हम हैं..

सोमवार, 19 अगस्त 2013

याद आता हूँ न बहना.....

लोरियाँ थी, गोद था
खिलौने थे, आमोद था।
पर अकेला था बचपन
तभी तुम थी आयी,
कलाई पकड़ मेरी
पुकारा था भाई।

विदा होके तुम क्यों हो गई पराई,
याद आता है न बहना तुम्हारा यह भाई।

तुमसे लड़ना-झगड़ना
कभी जोरों की तकरार
पापा की थी लाडली
लगाती शिकायतों का अम्बार।
पर नाज़ुक सा दिल तुम्हारा
जब पड़ती मुझे मार
क्यों आती थी तुम्हे रुलाई।

विदा होके तुम क्यों हो गई पराई,
याद आता है न बहना तुम्हारा यह भाई।

कितना करता मै तुम्हे परेशान
पर मुझमे ही रहती तुम्हारी जान।
सो जाता जब मै थक कर
नित ओढ़ाती तुम चादर।
मुझमे तो न थी
क्यों तुममे थी इतनी ख़ुदाई
तुम इश्वर की रहमत हो
जो मेरे जीवन में आयी।

विदा होके तुम क्यों हो गई पराई,
याद आता है न बहना तुम्हारा यह भाई।

निराशा के बादल जब छाते
पड़ती जब घर पे संकट
घर-संसार में प्राण थी भरती
तुम्हारी चंचल बातें, नादां मुस्कराहट।

पड़ती थी माँ जब बिमार
संभल लेती थी घर-रसोई
मुझसे कहती -न करो चिन्ता
पढो जाकर, मै हूँ न भाई।

विदा होके तुम क्यों हो गई पराई,
याद आता है न बहना तुम्हारा यह भाई।

अजीब सा था मौन क्रंदन
निःशब्द सारे, सूना आँगन।
पाहून संग तुम्हारी , जब हुई थी विदाई।
अब किसे चिढ़ाऊँ, किसे मनाऊं
तुम्हारे स्नेह की कैसे हो भरपाई।

विदा होके तुम क्यों हो गयी पराई
याद आता है न बहना तुम्हारा यह भाई

इस सावन भी डाकिया आया
लिफाफे में नेह का धागा लाया
इस बरस भी, सज जाएगी कलाई
राखी तो आई पर तुम न आयी।

विदा होके तुम क्यों हो गयी पराई
याद आता है न बहना तुम्हारा यह भाई।





















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