ये मै हूँ

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ये हम हैं..

शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

पिलाई थी यारों ने.....

पिलाई थी यारों ने उस दिन क़सम पर

यादों के सागर में जा मिली चुपके से
दो घूँट ज़ाम हलक से उतरकर।

जरूर वो शराब रही थी पुरानी
तभी तो बही वो कब की कहानी
दिल से आँखों का किनारा पकड़कर।

पिलाई थी यारों ने उस दिन क़सम पर

माज़ी की तन्हाइयों में सिसकती
वो दास्तां उस दिन रोई तड़पकर।

क़रार था यारों से जो न पियेंगे ज्यादा
टूटा था छन से मैख़ाने के दर पर।

पिलाई थी यारों ने उस दिन कसम पर

# माज़ी =past

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